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मार्च में होने वाले आईपीएल से पहले देश का माहौल काफी गर्म नजर आ रहा है। कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्ताफिजुर रहमान को टीम में शामिल किए जाने के बाद टीम के मालिक शाहरुख खान विवादों में घिर गए हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बीच बांग्लादेशी खिलाड़ी को खरीदने का फैसला कई लोगों को नागवार गुजर रहा है। नेताओं से लेकर संत-महात्माओं तक, हर तरफ से शाहरुख खान पर तीखी बयानबाजी हो रही है। इस विवाद की शुरुआत कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के बयान से हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर यह खिलाड़ी टीम में रखा गया तो केकेआर का बहिष्कार किया जाएगा। इसके बाद यह मामला और तूल पकड़ गया और सोशल मीडिया पर भी लोग खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करने लगे।
संतों का समर्थन, नेताओं की टिप्पणी और अलग राय भी सामने
देवकीनंदन ठाकुर के बयान का समर्थन पंडित धीरेंद्र शास्त्री और स्वामी रामभद्राचार्य ने भी किया। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि बांग्लादेश में ऐसी घटनाएं हो रही हैं जो हिंदुत्व के खिलाफ हैं और वहां के खिलाड़ियों को इस पर आवाज उठानी चाहिए। वहीं सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के संत देवेशाचार्य महाराज ने भी चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे समय में उस देश का खिलाड़ी भारत में खेल रहा है, यह गंभीर सोच का विषय है। उन्होंने शाहरुख खान से सवाल करते हुए कहा कि क्या उन्होंने कभी बांग्लादेश में पीड़ित हिंदुओं के लिए आवाज उठाई। उधर, बीजेपी नेता संगीत सोम की विवादित टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया, जब उन्होंने शाहरुख खान पर देश से गद्दारी का आरोप लगाया। हालांकि इस पूरे मामले में अलग राय भी सामने आई है। नवभारत के पूर्व संपादक डॉ. राकेश पाठक ने कहा कि आईपीएल भारत सरकार की अनुमति से होता है और बीसीसीआई के शीर्ष पदों पर बैठे लोग ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का संचालन करते हैं। उन्होंने कहा कि खेल को राजनीति और नफरत से दूर रखना चाहिए। कुल मिलाकर, आईपीएल शुरू होने से पहले यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा और आने वाले दिनों में इस पर और बयान सामने आ सकते हैं।
Patrakar Vandana singh
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