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दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने नए साल के दिन आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए तीन स्थानीय लोगों को दोषी करार दिया है। अदालत ने इन तीनों को आतंकियों की मदद करने, उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने और हथियार जुटाने जैसे गंभीर आरोपों में तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई। पुलिस के मुताबिक दोषी ठहराए गए लोगों में मेहराजुद्दीन मीर, फिरदौस अहमद भट और इरशाद अहमद मलिक शामिल हैं, जिन्हें वर्ष 2022 में गिरफ्तार किया गया था। इनके खिलाफ पुलवामा पुलिस थाने में आईपीसी की धारा 307, आर्म्स एक्ट की धारा 7 और 27 के साथ-साथ गैर कानूनी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम (UAPA) की कई धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए थे।
आतंकियों को मदद पहुंचाने का दोष साबित
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि तीनों दोषियों ने आतंकियों को न केवल पनाह दी, बल्कि उनकी विघटनकारी गतिविधियों के लिए जरूरी संसाधन भी मुहैया कराए। मेहराजुद्दीन मीर को UAPA की धारा 19 और 39 के तहत दोषी ठहराया गया, जिसमें धारा 19 के तहत तीन साल की साधारण कैद और 10 हजार रुपये का जुर्माना, जबकि धारा 39 के तहत तीन साल 10 महीने की सजा सुनाई गई है। वहीं फिरदौस अहमद भट और इरशाद अहमद मलिक को UAPA की धारा 39 के तहत दोषी मानते हुए तीन साल 10 महीने की कैद दी गई। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि तीनों दोषियों द्वारा हिरासत में पहले बिताई गई अवधि को उनकी सजा में समायोजित किया जाएगा। इस फैसले को आतंकवाद के खिलाफ चल रही कार्रवाई में एक अहम कदम माना जा रहा है।
Patrakar Vandana singh
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