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पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों और SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर बीजेपी मुश्किल में है। 4 जनवरी को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी नेता लाल सिंह आर्य ने कहा कि “जो भी बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत में आया है, उनका नाम मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए।” इस बयान के बाद मतुआ समुदाय में नाराजगी फैल गई, जिसे बंगाल में एक बड़ा राजनीतिक समूह माना जाता है। पार्टी ने विवाद को कम करने के लिए कहा कि यह आर्य का निजी विचार है और पार्टी की अधिकारिक राय नहीं, साथ ही वीडियो सोशल मीडिया से हटा लिया गया।
उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में मतुआ समुदाय के गोसांई (पंडित) से मारपीट की गई, जिसमें आरोप बीजेपी के केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के समर्थकों पर लगे हैं। मारपीट का कारण SIR से नाम हटाने को लेकर सवाल उठाना बताया जा रहा है। हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों से इनकार किया है। वहीं टीएमसी समर्थक ऑल इंडिया मतुआ महासंघ ने विरोध में सड़क जाम का ऐलान किया और समुदाय ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, साथ ही कहा कि SIR से हटाए गए नामों को वापस जोड़ा जाए।
मतुआ समुदाय पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना, नदिया और दक्षिण 24 परगना जिलों में निर्णायक भूमिका निभाता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 दिसंबर को कहा था कि SIR से मतुआ समुदाय को डरने की जरूरत नहीं है और CAA के तहत योग्य मतुआ और नामशूद्रों को कोई नुकसान नहीं होगा। पश्चिम बंगाल में SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 16 दिसंबर को जारी की गई थी, जिसमें 58.20 लाख नाम हटाने के लिए चिन्हित किए गए हैं। SIR का दूसरा चरण फरवरी 2026 तक चलेगा और अंतिम वोटर लिस्ट 14 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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