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छत्तीसगढ़ में बिजली बिल की बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे पावर कंपनी प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। छोटे और घरेलू उपभोक्ताओं पर सख्त कार्रवाई की जा रही है, जबकि बड़े और प्रभावशाली बकायादारों से वसूली करना चुनौती बन गया है। बकायादारों की सूची में विधानसभा और आईएएस एसोसिएशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल हैं। कंपनी के अनुसार केवल सरकारी विभागों पर लगभग 3 हजार करोड़ रुपये का बकाया है, जिसमें विधानसभा का 22.75 लाख और आईएएस एसोसिएशन का 64.35 लाख रुपये का बिल शामिल है। प्रदेश में कुल बकाया राशि करीब 7 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
पावर कंपनी ने बकाया वसूली के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। स्मार्ट मीटर की मदद से अब तीन बार मैसेज भेजकर कनेक्शन काटा जा रहा है। हालांकि, बड़े बकायादारों पर कार्रवाई की धीमी गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जबकि छोटे उपभोक्ताओं की बिजली तुरंत काट दी जाती है। रिकॉर्ड के अनुसार, विधानसभा ने आखिरी बार 20 नवंबर 2015 को भुगतान किया था, जबकि आईएएस एसोसिएशन ने 31 जनवरी 2011 के बाद कोई भुगतान नहीं किया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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