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मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने शहर की स्वच्छता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य की वाणिज्यिक राजधानी को लगातार आठ बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया, लेकिन हाल की घटनाओं ने इस पुरस्कार की सच्चाई पर शंका पैदा कर दी है। कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शहर के कई इलाकों का दौरा कर पानी की गुणवत्ता जांची और कहा कि नलों से लोगों को बदबूदार, सीवेज मिला पानी मिल रहा है। सिंघार ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार के ‘स्वच्छता’ और ‘विकसित भारत’ के दावे जमीनी हकीकत में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। प्रशासन ने अब तक छह मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोगों ने 17 मौतों का दावा किया है।
जनता की सुरक्षा और जल गुणवत्ता पर चिंता
उमंग सिंघार ने नगर निगम के बजट और स्वच्छता पुरस्कारों को देखकर सवाल उठाया कि आखिर ऐसा शहर जहां 8,000 करोड़ रुपये का बजट है, लोगों को साफ पानी क्यों नहीं मिल रहा। उन्होंने पूरे प्रदेश में जल गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की और जनता से भी अपील की कि वे अपने क्षेत्र में यह काम करें। इसके अलावा उन्होंने दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई, आपराधिक प्रकरण दर्ज करने और इंदौर महापौर के इस्तीफे की भी मांग की। सिंघार ने चेताया कि स्वच्छता के पुरस्कार लोगों को जिंदा नहीं रखते, जिंदा रहने के लिए उन्हें साफ पानी चाहिए, और सरकार इसमें विफल रही है।
Patrakar Vandana singh
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