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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 18 मौतों की घटना अब देश और विदेशों में सुर्खियों में है। विदेशी मीडिया में खबरों के प्रकाशित होने के कारण इसका सीधा असर शहर के पर्यटन क्षेत्र पर दिख रहा है। हाल ही में दो बड़े टूर निरस्त हो गए हैं और शहर आने वाले पर्यटक भी पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंतित हैं। आमतौर पर महेश्वर और ओंकारेश्वर जाने वाले पर्यटक इंदौर घूमने आते हैं, लेकिन इस बार उनकी संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। कांग्रेस ने भी इंदौर के स्वच्छता अवार्डों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है। भागीरथपुरा में 26 दिसंबर से मरीजों का आना शुरू हुआ था और इसके बाद मौतों की खबरें सामने आईं। देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाने वाला इंदौर इस घटना के कारण अपनी स्वच्छता की छवि को प्रभावित होते देख रहा है।
पर्यटन और प्रशासन की प्रतिक्रिया
इंदौर ट्रैवल्स एजेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष हेमेंद्र सिंह जादौन के अनुसार, मॉरीशस से आने वाला एक अधिकारी दल जनवरी के पहले सप्ताह में इंदौर दौरे पर आने वाला था, जिसे रद्द कर दिया गया। इसी तरह, बेंगलुरु से आने वाले एक समूह ने भी अपनी बुकिंग कैंसिल कर दी। दिसंबर और जनवरी पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण महीनों में आते हैं, लेकिन इस बार पर्यटकों की आमद कम है। इस मामले पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि गंदे पानी से हुई ये मौतें एक बड़ा सबक हैं। उन्होंने बताया कि बस्ती में पेयजल लाइन बिछाने के प्रस्ताव लंबित थे, जिन पर समय पर कार्य नहीं हुआ। विजयवर्गीय ने कहा कि वर्षों की मेहनत से बनी इंदौर की पहचान पर दाग लगा है, लेकिन शहर इस दुखद घटना के बाद बैठा नहीं रह सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंदौर का गौरव वापस लौटाने और शहर को पर्यटन के लिहाज से मजबूत बनाने के लिए नए सिरे से संकल्प लिया जाएगा।
Patrakar Vandana singh
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