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भोपाल में बाबर विषयक लिटरेचर फेस्टिवल विवादों में
literature festival in Bhopal,Babur,mired in controversy

भोपाल के बहुकला केंद्र भारत भवन में तीन दिन का भोपाल लिटरेचर फेस्टिवल (BLF) शुरू हो गया है, लेकिन यह आयोजन विवादों में फंस गया है। इस वर्ष के आयोजन का विषय है “बाबर भारत की खोज करने आया था”, जिस पर कई विद्वानों और नागरिकों ने आपत्ति जताई है। बाबर के आगमन और उसकी महिमा को लेकर चर्चा आयोजित करना, जबकि उसने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि को नष्ट किया था, कई लोगों के लिए विवादित है। विशेष रूप से यह तथ्य कि मध्य प्रदेश सरकार और संस्कृति विभाग इस आयोजन के आधिकारिक सहयोगी हैं, ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है। भारत भवन के नियमों के अनुसार किसी गैर-सरकारी संस्था को भवन किसी भी आयोजन के लिए उपलब्ध नहीं कराया जा सकता, लेकिन BLF के लिए यह नियम इस साल भी ताक पर रखा गया। आयोजन में बाबर समेत ऐसे विषयों पर विमर्श किया जाएगा, जिन्हें लेफ्ट-इको सिस्टम के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

न्यास की अनजानियों और सरकारी सहयोग पर सवाल

भारत भवन का संचालन न्यास के माध्यम से होता है, जो तय करता है कि कौन सा कार्यक्रम यहां आयोजित होगा। न्यासी राजीव वर्मा ने कहा कि उन्हें इस आयोजन और विवादित विषयों की कोई जानकारी नहीं है। आयोजन का संचालन पूर्व आईएएस राघव चंद्रा कर रहे हैं, लेकिन आमंत्रण पत्रों पर एसीएस संस्कृति और गृह शिव शेखर शुक्ल का नाम भी अंकित है, जिससे न्यास नियमों की अवहेलना होने का आरोप लगा है। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सरकार के साथ-साथ मप्र टूरिज्म, साहित्य अकादमी, जनजातीय कार्य मंत्रालय, इंडियन ऑयल, एनटीपीसी, एसबीआई और कई निजी संस्थान सहयोगी हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या भारत भवन जैसे सार्वजनिक और न्यास-निर्देशित स्थल पर ऐसे विवादित विषयों पर चर्चा करना उचित है या नहीं। पहले भी BLF में एलजीबीटीक्यू और अन्य संवेदनशील विषयों पर चर्चा आयोजित हो चुकी है, जिसे तत्कालीन सरकार ने गंभीरता से देखा था।

 

 

Vandana singh 10 January 2026

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