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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षाबलों को नक्सल विरोधी मोर्चे पर शुक्रवार को ऐतिहासिक सफलता मिली है। शासन की 'पुना मारगेम' (पुनर्वास से पुनर्जीवन) नीति से प्रभावित होकर कुल 63 माओवादियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से 36 माओवादियों पर 1 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये का सामूहिक इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में 18 महिलाएं भी शामिल हैं। ये नक्सली मुख्य रूप से दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर, अबूझमाड़ और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय थे। वरिष्ठ नेताओं में पाकलू उर्फ रैनू, मोहन उर्फ संजय, सुमित्रा उर्फ द्रोपती और हुंगी उर्फ अंकिता जैसे बड़े कैडर शामिल थे, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था।
पुनर्वास, कौशल विकास और नक्सल मुक्त भारत का लक्ष्य
आत्मसमर्पण के बाद, सरकार ने पुनर्वास नीति के तहत सभी 63 माओवादियों को 50-50 हजार रुपये की तत्काल सहायता राशि प्रदान की है। इसके साथ ही उन्हें कौशल विकास और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ देकर मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के उप महानिरीक्षक राकेश चौधरी, दंतेवाड़ा एसपी गौरव राय और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में यह आत्मसमर्पण हुआ। यह सफलता नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान में बड़ी मील का पत्थर है। 2025 में राज्य में 1500 से अधिक नक्सलियों ने हथियार छोड़े, और केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि सुरक्षाबलों के दबाव और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का असर अब जंगल के अंदर तक दिखाई दे रहा है।
Patrakar Vandana singh
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