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ISRO का साल 2026 का पहला सैटेलाइट मिशन PSLV-C62 सोमवार सुबह 10:18 बजे श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया, लेकिन तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी आने के कारण रॉकेट रास्ते से भटक गया और मिशन असफल हो गया। ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि तीसरे स्टेज में समस्या आने से EOS-09 ‘अन्वेषा’ समेत 15 सैटेलाइट तय कक्षा में स्थापित नहीं हो सके। इससे पहले मई 2025 में भी PSLV-C61 मिशन तीसरे चरण में फेल हुआ था।
EOS-09 अन्वेषा एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन और स्पाई सैटेलाइट है, जिसे DRDO ने विकसित किया है। यह हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग (HRS) तकनीक पर काम करता है, जिससे यह जंगलों, झाड़ियों और बंकरों में छिपी गतिविधियों की पहचान करने में सक्षम है। मिशन का लक्ष्य अन्वेषा और अन्य सैटेलाइट्स को 512 किमी की सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित करना था।
इस मिशन में कुल 15 सैटेलाइट शामिल थे, जिनमें 7 भारतीय और 8 विदेशी सैटेलाइट थे। हैदराबाद की ध्रुवा स्पेस ने 7 सैटेलाइट भेजे, जबकि फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूके के सैटेलाइट भी शामिल थे। यह मिशन न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) द्वारा ऑपरेट किया गया और भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा था, क्योंकि PSLV मिशन में पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी की इतनी बड़ी भागीदारी थी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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