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संविधान निर्माण में दरभंगा राज का योगदान
Darbhanga Raj,Constitution

दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी के निधन के साथ एक युग का अंत हो गया, लेकिन उनके और महाराज कामेश्वर सिंह के योगदान को भारत कभी नहीं भूल पाएगा। देश के संविधान निर्माण में भी उनका अहम योगदान रहा। वर्ष 1950 में गठित संविधान सभा के कुल 284 सदस्यों में महाराज कामेश्वर सिंह और महारानी कामसुंदरी देवी दोनों शामिल थे। महाराज ने संविधान की मूल प्रति पर हस्ताक्षर करते समय ‘दरभंगा’ का नाम अंकित किया। महारानी कामसुंदरी देवी संविधान सभा की उन पत्नियों में अंतिम जीवित सदस्य थीं, जिनका सीधे संविधान निर्माण से जुड़ाव था। उनके निधन के साथ भारतीय राजशाही की एक अंतिम जीवित निशानी भी समाप्त हो गई।

शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र सेवा में अतुलनीय योगदान

महारानी कामसुंदरी देवी और महाराज कामेश्वर सिंह ने शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और विज्ञान के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दिया। दिल्ली स्थित दरभंगा हाउस आज इंटेलिजेंस ब्यूरो का मुख्यालय है, जबकि नरगौना पैलेस ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय को दान किया गया। पटना हाउस, इलाहाबाद और बनारस विश्वविद्यालयों को भी उनके योगदान से लाभ मिला। 1962 के भारत-चीन युद्ध में देश संकट में था, तब उन्होंने तीन विमान और करीब 600 किलो सोना राष्ट्र को दान किया। विज्ञान, संस्कृति और प्राच्य विद्या के संरक्षण में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने डॉ. सी. वी. रमन को बहुमूल्य हीरा दिया और अपने आवास को कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप में समर्पित किया। राज परिवार ने कला, संगीत, रेलवे और संचार के क्षेत्र में भी विकास और संरक्षण के कार्य किए। दरभंगा राज और महारानी कामसुंदरी देवी के ये योगदान आज भी देश के सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक इतिहास में अमिट छाप छोड़ते हैं।

Vandana singh 13 January 2026

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