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भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक मंगलवार को भारी हंगामे और राजनीतिक टकराव के बीच हुई। बैठक में स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया और कांग्रेस तथा भाजपा पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस पार्षदों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट किया, जबकि भाजपा के कुछ पार्षदों ने भी नाराजगी जाहिर की। विपक्ष महापौर और एमआईसी सदस्यों को जांच के दायरे में लाने पर अड़ा रहा, जबकि पक्ष का कहना था कि यह मामला वर्तमान एमआईसी के कार्यकाल से पहले का है। इस दौरान नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि परिषद द्वारा लिए गए सभी निर्णयों का पालन प्रशासन करेगा। एमआईसी सदस्य आरके सिंह बघेल ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की, जबकि अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने स्पष्ट किया कि भोपाल को मांस की मंडी नहीं बनने दिया जाएगा, स्लॉटर हाउस को स्थायी रूप से बंद करने के निर्देश आयुक्त को दिए गए और 11 कर्मचारियों को निलंबित किया गया।
तीन बड़े प्रस्ताव और आगे की कार्रवाई
बैठक में राजनीतिक हंगामे के बीच तीन अहम प्रस्ताव पारित किए गए। अब कॉलोनियों में व्यक्तिगत जल कनेक्शन दिए जाएंगे, मैरिज रजिस्ट्रेशन शुल्क में भारी कटौती कर 30 दिन में केवल 130 रुपए निर्धारित किए गए और अमृत 2.0 योजना के तहत शहर में जल और सीवरेज सुधार पर 1757 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा, नगर निगम अध्यक्ष ने स्लॉटर हाउस के संचालन में शामिल एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने और भविष्य में किसी भी टेंडर में भाग लेने से रोकने के निर्देश दिए। महापौर मालती राय ने स्पष्ट किया कि स्लॉटर हाउस मामले में पहले ही उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए जा चुके हैं और एमआईसी ने गोवंश कटान की कोई अनुमति नहीं दी। परिषद की ओर से जांच निगम से बाहर के वरिष्ठ शासन अधिकारियों द्वारा कराई जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस बैठक में हंगामा और विरोध के बीच शहर की प्रशासनिक जिम्मेदारी और कानून व्यवस्था पर भी ध्यान रखा गया।
Patrakar Vandana singh
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