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गिग वर्कर्स को मिली नई सामाजिक सुरक्षा
Gig workerssocial security benefits

कांग्रेस नेत्री सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि गिग वर्कर्स अब अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा बन चुके हैं और उनकी काम करने की परिस्थितियों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। उनकी प्रेरणा से कई राज्य सरकारों ने गिग वर्कर्स के लिए पैकेज की घोषणा की है। केंद्र सरकार ने भी सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code, 2020) के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इन नियमों के अनुसार, यदि कोई वर्कर केवल एक कंपनी के साथ काम करता है तो उसे सालाना कम से कम 90 दिन काम करना अनिवार्य है और अगर कई प्लेटफॉर्म पर काम करता है तो कुल मिलाकर 120 दिन जरूरी होंगे। साथ ही प्रमुख कंपनियों ने '10 मिनट में डिलीवरी' जैसे वादे हटाकर वर्कर्स पर समय का दबाव कम किया है और सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम घटाने का कदम उठाया है।

डिजिटल पहचान और राष्ट्रीय सुरक्षा कोष

सभी पात्र गिग वर्कर्स को डिजिटल पहचान पत्र (Universal Account Number) दिया जाएगा, जिसे 16 वर्ष से ऊपर कोई भी आधार के माध्यम से 'ई-श्रम' पोर्टल पर पंजीकरण करवा सकता है। एग्रीगेटर कंपनियों के लिए अपने वर्कर्स का डेटा सरकार के साथ साझा करना अनिवार्य होगा। एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कोष भी बनाया जाएगा, जिसमें कंपनियां अपने सालाना टर्नओवर का 1% से 2% या वर्कर्स को किए गए भुगतान का 5% जमा करेंगी। इस कोष से दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य लाभ, मातृत्व लाभ और पेंशन जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। कंपनियों को आंतरिक विवाद समाधान समितियां बनानी होंगी और वर्कर्स की आईडी को बिना सूचना ब्लॉक करने पर रोक होगी। इन सभी नियमों को 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य रखा गया है, फिलहाल जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे जा रहे हैं।

Vandana singh 14 January 2026

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