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लिव-इन रिलेशनशिप पर CG हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर संपत्ति और पितृत्व अधिकारों पर एक अहम और स्पष्ट फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि महिला का पहला विवाह कानूनी रूप से समाप्त नहीं हुआ है, तो किसी अन्य पुरुष के साथ लिव-इन रिलेशनशिप को वैध रिश्ता नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में न तो दूसरे रिश्ते को कानूनी मान्यता मिलेगी और न ही उससे जन्मे बच्चों को संपत्ति या उत्तराधिकार का अधिकार प्राप्त होगा।

 

जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस ए.के. प्रसाद की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि पहले विवाह के रहते महिला से जन्मे बच्चों की कानूनी पहचान पहले पति से ही जुड़ी मानी जाएगी। भले ही महिला किसी अन्य पुरुष के साथ लंबे समय तक लिव-इन में रही हो और वह पुरुष बच्चों को अपनी संतान मानता हो, लेकिन कानून की नजर में पितृत्व का निर्धारण पहले पति से ही होगा।

 

यह मामला तब सामने आया जब दो महिलाओं ने स्वयं को बिलासपुर के एक कारोबारी की बेटियां बताते हुए उसकी संपत्ति में अधिकार की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि उनकी मां का कारोबारी के साथ विवाह हुआ था, लेकिन फैमिली कोर्ट ने पाया कि मां के पहले पति के तलाक या मृत्यु का कोई वैध प्रमाण नहीं दिया गया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पहला विवाह समाप्त हुए बिना दूसरा विवाह या लिव-इन रिश्ता शून्य माना जाएगा, इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।

Priyanshi Chaturvedi 16 January 2026

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