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केंद्र सरकार मनरेगा के बाद यूपीए दौर में बने दो अहम कानून—शिक्षा का अधिकार और खाद्य सुरक्षा कानून—में सुधार करने की योजना बना रही है। सरकार चाहती है कि इन योजनाओं का लाभ हर योग्य व्यक्ति तक पहुंचे और सभी लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन पूर्ण हो। शुरुआत नियमों और आदेशों के सुधार से की जाएगी, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर नए बिल के रूप में संसद में संशोधन लाया जा सकता है। इसके अलावा सरकार घर पाने के अधिकार को कानूनी रूप देने पर भी विचार कर रही है।
सरकार की जांच में पाया गया कि इन कानूनों के जरिए हर बच्चे को शिक्षा और हर परिवार को खाद्य सुरक्षा नहीं मिल पा रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्देश है कि सभी लाभार्थियों का 100% रजिस्ट्रेशन हो और योजनाओं का लाभ सही समय पर और सही तरीके से पहुंचे। सरकार पांच क्षेत्रों—शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आवास—में सुधार के लिए तीन अहम कदम तय करना चाहती है: समय-सीमा के साथ लक्ष्य तय करना, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग, और राष्ट्रव्यापी पंजीकरण अभियान।
खाद्य सुरक्षा कानून, 2006 के तहत नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन सुनिश्चित किया जाता है। FSSAI इसके तहत लागू होता है और उल्लंघन पर जुर्माना, लाइसेंस रद्द या जेल की कार्रवाई होती है। वहीं शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 हर 6 से 14 साल के बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का संवैधानिक अधिकार देता है। यह कानून कॉलेज और विश्वविद्यालयों पर लागू नहीं है। दिसंबर 2025 में मनरेगा की जगह पास किए गए VB-G Ram G बिल को विपक्षी दलों ने विरोध किया था, खासकर महात्मा गांधी के नाम हटाने के कारण।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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