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चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई 7 फरवरी तक पूरी करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए राज्य में 6,500 सुनवाई केंद्र बनाए गए हैं, जहां हर दिन लगभग 7,00,000 सुनवाई की जाएगी। आयोग का मानना है कि निर्धारित समय में यह काम पूरा हो जाएगा और 14 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।
प्रत्येक सुनवाई केंद्र में चुनावी अधिकारियों को प्रतिदिन लगभग 107 मामलों की सुनवाई करनी होगी। अनमैप्ड वोटरों और लॉजिकल विसंगति वाले मामलों की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। इन मामलों में ऐसे वोटर शामिल हैं, जिन्होंने 2002 की वोटर लिस्ट के साथ कोई लिंक स्थापित नहीं किया या जिनके परिवार के डेटा में विसंगति पाई गई थी।
सुनवाई के दौरान वोटरों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की दो चरणों में वेरिफिकेशन और ऑथेंटिकेशन की जाएगी। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ERO) पहला चरण करेंगे और जिला मजिस्ट्रेट, जो कि जिला चुनाव अधिकारी भी हैं, दूसरा चरण करेंगे। राज्य सरकार द्वारा जारी डोमिसाइल सर्टिफिकेट और वेस्ट बंगाल बोर्ड के एडमिट कार्ड को असली पहचान पत्र नहीं माना जाएगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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