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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विकास बनाम पर्यावरण की बहस एक बार फिर तेज हो गई है। अरेरा हिल्स इलाके में सैकड़ों पुराने पेड़ों की कटाई की तैयारी के विरोध में नापतौल विभाग के कर्मचारी और पर्यावरण प्रेमी सड़कों पर उतर आए हैं। नापतौल विभाग परिसर में 150 से ज्यादा और मेट्रो परियोजना के तहत पुल बोगदा के पास करीब 180 पेड़ काटे जाने की योजना है। इनमें 35 से 50 साल पुराने कटहल, आम, अमरूद, पीपल और नीम जैसे पेड़ शामिल हैं।
यह विरोध 64 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले चार मंजिला सरकारी भवन को लेकर हो रहा है, जिसे चार विभागों के लिए प्रस्तावित किया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि जिन विभागों के लिए भवन बनाया जा रहा है, उनमें से अधिकांश के पास पहले से अपने कार्यालय हैं और सिर्फ एक विभाग किराए के भवन में संचालित हो रहा है। आरोप है कि जगह की कमी का हवाला देकर कर्मचारियों को पहले ही अन्य स्थानों पर भेज दिया गया था, जबकि अब उसी परिसर में दूसरे विभागों को शिफ्ट किया जा रहा है।
गुरुवार को कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर, पेड़ों से लिपटकर और नारेबाजी कर ‘चिपको आंदोलन’ की तर्ज पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसी भी कीमत पर पेड़ों की कटाई नहीं होने दी जाएगी और भवन निर्माण का प्रस्ताव वापस लिया जाना चाहिए। नापतौल विभाग के नियंत्रक बृजेश सक्सेना ने कहा कि निर्माण वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा किया जाना है और पेड़ कटेंगे या नहीं, इसका फैसला संबंधित एजेंसी करेगी, जबकि कर्मचारी संगठन वैकल्पिक सरकारी जमीन पर भवन निर्माण की मांग कर रहे हैं।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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