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आर्थिक सर्वे में देश की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ नागरिकों की सेहत पर भी गंभीर चिंता जताई गई है। जंक फूड की बढ़ती खपत और बच्चों में मोटापे के खतरे को देखते हुए सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक जंक फूड विज्ञापनों पर रोक लगाने का सुझाव दिया गया है। सर्वे के मुताबिक 2020 में जहां 3.3 करोड़ बच्चे मोटापे का शिकार थे, वहीं 2035 तक यह संख्या 8.3 करोड़ तक पहुंच सकती है। इसी के चलते फूड पैकेजिंग पर साफ चेतावनी और पोषण लेबलिंग नीति लाने पर जोर दिया गया है।
आर्थिक मोर्चे पर सर्वे ने मजबूत तस्वीर पेश की है। वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रहने का अनुमान है। महंगाई दर RBI के तय दायरे में बने रहने की उम्मीद है, जबकि रोजगार के मोर्चे पर 15 वर्ष से अधिक आयु के 56.2 करोड़ लोग कामकाज में लगे हुए हैं। वैश्विक अस्थिरताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बताई गई है।
सर्वे में राज्यों की ‘फ्रीबीज’ नीति पर चेतावनी दी गई है और डिजिटल लत, ट्रैफिक जाम व लाइफस्टाइल बीमारियों जैसे मुद्दों पर भी समाधान सुझाए गए हैं। सोशल मीडिया के लिए उम्र-आधारित नियंत्रण, छात्रों को साधारण फोन देने, पीक ऑवर में अतिरिक्त शुल्क और हेल्थ सप्लीमेंट पर जागरूकता बढ़ाने जैसे सुझाव शामिल हैं। कुल मिलाकर, सर्वे ने विकास के साथ जिम्मेदार नीतियों की जरूरत पर जोर दिया है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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