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मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मामला एक बार फिर अधर में लटक गया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर होने वाली सुनवाई टल गई, जिसके बाद अब अगली सुनवाई 4 फरवरी को संभावित है। लगातार तारीख आगे बढ़ने से ओबीसी महासभा में नाराजगी बढ़ गई है और संगठन ने एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने के संकेत दिए हैं। इसे लेकर महासभा की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।
ओबीसी महासभा का कहना है कि अब सिर्फ अदालत की तारीखों का इंतजार नहीं किया जाएगा। यदि जल्द कोई ठोस फैसला नहीं आता है तो आंदोलन किया जाएगा। महासभा के पदाधिकारियों के अनुसार, आरक्षण से जुड़े इस मामले में हो रही देरी ने ओबीसी समाज के धैर्य की परीक्षा ले ली है और इसे उनके संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा माना जा रहा है।
वहीं सरकार की ओर से सफाई दी गई है कि सुप्रीम कोर्ट में उसका पक्ष रखा गया। सुनवाई के दौरान एएसजी केएम नटराज, स्टैंडिंग काउंसिल और एएजी ने अदालत में तथ्य प्रस्तुत किए। हालांकि, ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य लोकेंद्र गुर्जर का आरोप है कि सरकार ने कोई ठोस और प्रभावी पक्ष नहीं रखा, जिससे 13 प्रतिशत होल्ड हटाने की दिशा में फैसला नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि अब आंदोलन अनिवार्य हो गया है और जल्द ही इसकी तारीख घोषित की जाएगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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