Since: 23-09-2009

  Latest News :
मुख्यमंत्री सरमा ने गोगोई पर लगाया वैश्विक साजिश का आरोप.   परीक्षा पे चर्चा में मोदी ने कहा- अनुशासन के बिना प्रेरणा बोझ बन जाती है.   संसद में गतिरोध के बीच ओम बिरला से मिले राहुल गांधी.   आरएसएस प्रमुख किसी जाति का नहीं होगा, केवल हिंदू होना जरूरी: मोहन भागवत.   अमेरिका ने भारत को दिया पैक्स सिलिका पहल में शामिल होने का न्योता, रणनीतिक रिश्ते होंगे और मजबूत.   कांग्रेस MLA गणेश घोघरा का बड़ा आरोप, मंत्री के बेटे के नाम 52 बीघा जमीन घोटाले का दावा.   हॉक फोर्स के 60 जवानों को मिला आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन.   मप्र में 10 फरवरी से शुरू होंगी बोर्ड परीक्षाएं.   भोपाल में गोमांस और गंदे पानी को लेकर कांग्रेस का निगम दफ्तर पर घेराव.   शिवराज बोले- भारत-अमेरिका ट्रेड डील में किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित.   इंदौर में ‘यूथ वॉक-2026’: हजारों युवाओं ने नशे के खिलाफ लिया संकल्प.   एमपी की बिटिया ने रचा इतिहास, माउंट किलिमंजारो पर फहराया तिरंगा.   10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा शुल्क में 5 साल बाद बढ़ोतरी, अब छात्रों को देने होंगे 800 रुपये.   तंत्र-मंत्र के झांसे में कारोबारी से 3.50 लाख की ठगी, नकली नोट मिले.   दीपका माइंस में ट्रेलर में आग, कोयला न होने से बड़ा नुकसान टला.   केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ दौरे पर, 51 नक्सलियों का हुआ सरेंडर.   छत्तीसगढ़ में मौसम स्थिर, ठंड का असर जारी; दो दिन बाद बढ़ेगा रात का तापमान.   WhatsApp पर ठगी का नया जाल, फर्जी लिंक क्लिक करते ही कर्मचारी के खाते से 5 लाख उड़ाए.  
परीक्षा पे चर्चा में मोदी ने कहा- अनुशासन के बिना प्रेरणा बोझ बन जाती है
new delhi,

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को देशभर के छात्रों से संवाद करते हुए पढ़ाई, जीवन और भविष्य की सफलता से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण और प्रासंगिक मंत्र दिया- अनुशासन के बिना प्रेरणा अधूरी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल मोटिवेशन से लक्ष्य हासिल नहीं होते, बल्कि निरंतर अभ्यास, नियमित दिनचर्या और आत्म-अनुशासन ही किसी भी सपने को साकार करते हैं।

 

प्रधानमंत्री ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के नौवें संस्करण के दूसरे एवं अंतिम एपिसोड में कोयंबटूर (तमिलनाडु), रायपुर (छत्तीसगढ़), गुजरात और गुवाहाटी (असम) के छात्रों से संवाद किया। इस दौरान प्रधानमंत्री और छात्रों के बीच हुए संवाद में स्टार्टअप, विकसित भारत 2047, परीक्षा के तनाव, यात्रा, खेल, पढ़ाई और नेतृत्व जैसे विषयों पर अहम सवाल उठे। प्रधानमंत्री ने सरल उदाहरणों और व्यावहारिक सुझावों के जरिए छात्रों को न केवल परीक्षा, बल्कि जीवन के लिए भी दिशा दी।

 

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के समय में छात्र तनाव, तुलना और असफलता के भय से घिरे रहते हैं, लेकिन यदि वे स्वयं पर विश्वास रखते हुए अनुशासित जीवन अपनाएं, तो हर चुनौती अवसर में बदल सकती है। उन्होंने छात्रों को समझाया कि परीक्षा कोई बोझ नहीं, बल्कि स्वयं को परखने और बेहतर बनने का अवसर है। इसी सोच के साथ ‘परीक्षा पे चर्चा’ का उद्देश्य डर हटाकर आत्मविश्वास जगाना है।

प्रेरणा बनाम अनुशासन पर छात्रों के सवाल का उत्तर देते हुए प्रधानमंत्री ने एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई किसान अपने पड़ोसी की अच्छी फसल देखकर प्रेरित तो हो जाए, लेकिन समय पर खेत की तैयारी न करे, तो बारिश आने के बाद भी उसे अच्छा परिणाम नहीं मिलेगा। इसी तरह, प्रेरणा तभी काम आती है जब उसके साथ अनुशासन जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि अनुशासन आधार है और प्रेरणा उसे सजाने का काम करती है। मोदी ने कहा, “जीवन में डिसिप्लिन बहुत अनिवार्य है, इंस्पिरेशन में सोने में सुहागा का काम करता है। अगर डिसिप्लिन नहीं है, कितना ही इंस्पिरेशन क्यों ना हो, वो फिर बोझ बन जाता है, निराशा पैदा करता है।”

रिवीजन और परीक्षा तनाव पर प्रधानमंत्री ने छात्रों को सलाह दी कि वे पढ़ाई को आखिरी समय पर टालने की बजाय प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा अभ्यास करें। लिखने की आदत, प्रश्न हल करने का अभ्यास और समय का सही प्रबंधन तनाव को स्वतः कम कर देता है। साथ ही छात्रों को अपनी तैयारी पर भरोसा रखना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि जो छात्र पढ़ाई में कमजोर हों, उन्हें पढ़ाने से अपनी समझ और मजबूत होती है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों को दूसरों से तुलना करने के बजाय स्वयं से प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर दिन खुद से सवाल करें—क्या आज मैं कल से बेहतर बना? यही सोच निरंतर प्रगति का रास्ता खोलती है।

आत्मविश्वास पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ‘आत्मा’ और ‘विश्वास’ से ही सच्ची शक्ति पैदा होती है। जो खुद पर भरोसा करता है, वह असफलता से डरता नहीं, बल्कि उससे सीखता है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद और सचिन तेंदुलकर के उदाहरण देकर बताया कि महान लोग भी असफल होते हैं, लेकिन आत्मविश्वास नहीं खोते।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि तकनीक इंसान की सहायक है, मालिक नहीं। उन्होंने छात्रों को चेताया कि सीखने की जगह तकनीक पर निर्भर होना खतरनाक हो सकता है। एआई का उपयोग समझ बढ़ाने और क्षमताएं निखारने के लिए होना चाहिए, न कि मेहनत से बचने के लिए। उन्होंने कहा, “मैं समझता हूं हमने टेक्नोलॉजी को समझना होगा, खुद का विस्तार करना होगा, उसमें उस टेक्नोलॉजी की ताकत को जोड़ना होगा। हमारे कामों में वैल्यू एडिशन करें। अगर ये होता है, तो मैं पक्का मानता हूं कि कितनी ही उत्तम से उत्तम टेक्नोलॉजी क्यों ना आए, हमें उपयोग होने ही वाली है, हमें डरने की जरूरत नहीं है।”


प्रधानमंत्री ने छात्रों को यह भी संदेश दिया कि जीवन केवल किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए। खेल, कला, संगीत और प्रकृति से जुड़ाव मन को तरोताजा रखता है और पढ़ाई में भी मदद करता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और शांत मन के बिना कोई भी लक्ष्य हासिल करना कठिन है। मोदी ने कहा कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ केवल बोर्ड परीक्षा की तैयारी का मंच नहीं है, बल्कि जीवन की चुनौतियों से निपटने की सीख है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे परीक्षा को उत्सव की तरह लें, डर की तरह नहीं।

 

छात्रा छवि जैन के स्टार्टअप से जुड़े सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि सबसे पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि व्यक्ति क्या करना चाहता है—टेक्नोलॉजी इनोवेशन, ड्रोन या किसी व्यावहारिक समस्या का समाधान। उन्होंने सलाह दी कि टेक्नोलॉजी और फाइनेंस में रुचि रखने वाले दोस्तों के साथ छोटी टीम बनाकर साइड में स्टार्टअप शुरू किया जा सकता है। उम्र कोई बाधा नहीं है। मौजूदा स्टार्टअप्स से मिलने, प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने और स्कूल प्रोजेक्ट के रूप में सीखने पर उन्होंने जोर दिया।

भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित देश बनने के लिए विकसित आदतें जरूरी हैं। कचरा न फैलाना, ट्रैफिक नियमों का पालन, भोजन की बर्बादी रोकना और ‘वोकल फॉर लोकल’ अपनाना हर नागरिक का योगदान है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे कदम मिलकर देश को आगे बढ़ाते हैं।

छात्रों की वेकेशन यात्रा के सवाल पर प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि पहले अपनी तहसील, जिला और राज्य को जानें। उन्होंने कहा कि छात्र के रूप में ट्रेन से यात्रा करना, साथ में खाना ले जाना और लोगों से मिलना जीवन का बड़ा अनुभव देता है। नेतृत्व पर प्रधानमंत्री ने कहा कि सच्चा नेता पहले निडर होता है और खुद से शुरुआत करता है। कूड़ा उठाने जैसे छोटे काम से भी नेतृत्व दिखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेतृत्व भाषण या चुनाव नहीं, बल्कि लोगों को समझने और समझाने की क्षमता है।

अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि छात्र अनुशासन, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास को अपना लें, तो न केवल परीक्षा में, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता निश्चित है। यही संदेश ‘परीक्षा पे चर्चा’ की आत्मा है और यही विकसित भारत की मजबूत नींव भी।


उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को अपने आवास पर ‘परीक्षा पे चर्चा’ 2026 के नौवें संस्करण के पहले एपिसोड में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों से संवाद किया था। दूसरे और अंतिम एपिसोड में प्रधानमंत्री ने आज कोयंबटूर (तमिलनाडु), रायपुर (छत्तीसगढ़), गुजरात और गुवाहाटी (असम) में छात्रों से संवाद किया।

MadhyaBharat 9 February 2026

Comments

Be First To Comment....
Video

Page Views

  • Last day : 8641
  • Last 7 days : 45219
  • Last 30 days : 64212


x
This website is using cookies. More info. Accept
All Rights Reserved ©2026 MadhyaBharat News.