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छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में पराली जलाने के मामलों में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। शासन द्वारा पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद खेतों में फसल अवशेष जलाने पर अब तक 50 किसानों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं। कृषि विभाग के अनुसार कई किसान रात में चोरी-छिपे पराली जला रहे थे, जिससे खेतों के साथ-साथ मकान, सिंचाई पाइप और कृषि उपकरण भी आग की चपेट में आ रहे हैं। सभी मामले तहसील न्यायालय में लंबित हैं और आगे जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों पर धारा-188 के तहत छह महीने तक की सजा हो सकती है। जमीन के रकबे के आधार पर 2,500 से 30,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी अड़चन आ सकती है। हाल ही में सिहावा क्षेत्र में एक किसान द्वारा पराली जलाने से आग फैल गई और करीब 1.5 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। फायर ब्रिगेड ने दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
कृषि विज्ञान केंद्र संबलपुर के कीट वैज्ञानिक डॉ. शक्ति वर्मा ने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी के 16 प्रकार के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और सूक्ष्मजीव व केंचुए मर जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरता घटती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि पराली को जलाने की बजाय जुताई कर मिट्टी में मिला दें, जिससे यह कंपोस्ट बनकर उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है। उपसंचालक कृषि विभाग मोनेश साहू ने भी स्पष्ट किया कि पराली जलाना प्रतिबंधित है और पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्ती जारी रहेगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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