भारत-नेपाल के बीच कानूनी सहायता समझौता, आपराधिक जांच और आतंकवाद से निपटने में बढ़ेगा सहयोग
भारत और नेपाल ने आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे दोनों देशों के सक्षम अधिकारियों को जांच और कानूनी कार्यवाही में सहयोग मिलेगा। कई वर्षों की बातचीत के बाद हुए इस समझौते पर काठमांडू में हस्ताक्षर किए गए, जबकि पिछले साल जुलाई में नई दिल्ली में गृह सचिव स्तर की बैठक में इस पर सहमति बनी थी। यह समझौता वित्तीय और गैर-वित्तीय अपराधों के साथ-साथ आतंकवाद से निपटने के सहयोग को औपचारिक रूप देता है।
दोनों देशों के अधिकारियों की मौजूदगी में दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते हुए कहा गया कि इससे आपराधिक मामलों की जांच, अभियोजन और न्यायिक कार्यवाही के दौरान साक्ष्य एकत्र करने और उनके आदान-प्रदान के लिए औपचारिक कानूनी ढांचा मिलेगा। अधिकारियों के मुताबिक यह समझौता कानून के शासन को मजबूत करने और न्याय प्रशासन में संस्थागत समन्वय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
समझौते के लागू होने से नेपाल में वित्तीय अपराधों को कम करने और जांच व न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद है। साथ ही यह मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण की रोकथाम से जुड़े पारस्परिक मूल्यांकन में भी मदद करेगा। काठमांडू के अधिकारियों का मानना है कि भारत के साथ यह समझौता नेपाल को वैश्विक संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने में भी सहायक हो सकता है।