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डीलिस्टिंग कानून की मांग तेज, जनजातीय समाज की दिल्ली में महारैली का ऐलान
Demand, delisting law intensifies, tribal community announces mega rally,Delhi

 

डीलिस्टिंग कानून की मांग को लेकर देशभर का जनजातीय समाज लामबंद हो रहा है। जनजातीय संगठनों का कहना है कि मतांतरण के बाद भी अनुसूचित जनजाति की सूची में बने रहने से मूल जनजातीय समाज को मिलने वाले अधिकारों और सुविधाओं पर असर पड़ रहा है। इसी मांग को लेकर 24 मई 2026 को रामलीला मैदान में महारैली प्रस्तावित है, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की तैयारी की जा रही है।

जनजातीय सुरक्षा मंच का दावा है कि लगभग 18 प्रतिशत मतांतरित वर्ग कथित तौर पर अधिकांश लाभ ले रहा है, जबकि बड़ी आबादी को अपेक्षाकृत कम फायदा मिल रहा है। मंच का कहना है कि अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने के लिए डीलिस्टिंग कानून जरूरी है। इस मुद्दे को लेकर देश के विभिन्न जनजाति बहुल क्षेत्रों में बैठकों और जनजागरण अभियान का दौर जारी है।

डीलिस्टिंग की मांग का इतिहास पुराना बताया जाता है। वर्ष 1967 में कार्तिक उरांव ने संसद में यह मुद्दा उठाया था, जिसके बाद संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिश भी सामने आई थी, लेकिन इसे अब तक कानून का रूप नहीं दिया जा सका। अब विभिन्न राज्यों से बड़ी भागीदारी के साथ प्रस्तावित रैली को जनजातीय एकजुटता के बड़े प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

 
 
Priyanshi Chaturvedi 18 February 2026

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