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मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के दौरान White House ने राष्ट्रपति Donald Trump का 2026 का व्यापार नीति एजेंडा पेश किया है। एजेंडे में अमेरिका के बढ़ते व्यापार घाटे को राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है। इसमें टैरिफ को और सख्त करने, व्यापार कानूनों को कड़ाई से लागू करने और पुराने व्यापार समझौतों पर पुनर्विचार करने की बात कही गई है। प्रशासन का दावा है कि हाइपर-ग्लोबलाइजेशन के कारण लाखों मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां विदेश चली गईं और हजारों कारखाने बंद हुए, इसलिए अब उत्पादन को फिर से अमेरिका में बढ़ाने की जरूरत है।
एजेंडे में कहा गया है कि 2001 में World Trade Organization में चीन के शामिल होने के बाद अमेरिका को भारी औद्योगिक नुकसान उठाना पड़ा। प्रशासन के अनुसार, 2025 में चीन के साथ व्यापार घाटे में 32 प्रतिशत की कमी आई है और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। दस्तावेज में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अमेरिका चीन के साथ व्यापार जारी रखना चाहता है, लेकिन “पारस्परिकता और संतुलन” के आधार पर। अक्टूबर 2025 में ट्रंप और Xi Jinping के बीच बुसान में हुआ समझौता इसी दिशा में पहला कदम बताया गया है।
एग्रीमेंट ऑन रेसिप्रोकल ट्रेड (ART) कार्यक्रम के तहत अमेरिका ने कई देशों के साथ समझौते और ढांचा घोषणाएं की हैं। अर्जेंटीना, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया और ताइवान सहित कई देशों के साथ समझौते किए गए हैं, जबकि भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ के साथ नए फ्रेमवर्क की घोषणा की गई है। इन समझौतों के तहत साझेदार देशों को टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं कम करनी होंगी, जबकि अमेरिका संशोधित टैरिफ बनाए रखेगा। साथ ही, प्रशासन 2026 में United States–Mexico–Canada Agreement की संयुक्त समीक्षा का नेतृत्व करेगा और लंबित विवाद सुलझने पर ही इसके नवीनीकरण की सिफारिश करेगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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