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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ओबीसी क्रीमीलेयर की पात्रता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी महिला अभ्यर्थी का क्रीमीलेयर स्टेटस तय करने में उसके पति की आय या पद को आधार नहीं बनाया जाएगा। आरक्षण का लाभ लेने के लिए केवल अभ्यर्थी के माता-पिता की सामाजिक और आर्थिक स्थिति ही पैमाना होगी। इस फैसले के साथ कोर्ट ने सहायक प्राध्यापक (लॉ) के पद पर हुई एक नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को भी खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता सुनीता यादव ने चयनित अभ्यर्थी गरिमा राठौर की नियुक्ति चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि गरिमा के पति सिविल जज हैं और उनकी पारिवारिक आय तय सीमा से अधिक है, इसलिए गरिमा को ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। सुनीता ने अदालत से मांग की थी कि गरिमा की नियुक्ति रद्द कर उन्हें 2021 से वरिष्ठता के साथ नियुक्ति दी जाए।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई में कहा कि क्रीमीलेयर का निर्धारण जन्म के समय मिली सामाजिक स्थिति पर आधारित होता है। चयनित अभ्यर्थी गरिमा के पिता वर्ग-3 कर्मचारी और माता गृहिणी थीं, इसलिए उनका आरक्षण माता-पिता की स्थिति के आधार पर तय होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति की सैलरी या पद से महिला अभ्यर्थी का क्रीमीलेयर स्टेटस प्रभावित नहीं होगा।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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