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इंदौर। भारत जोड़ो मैदान में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ के संदर्भ में मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी एवं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता को संबोधित किया। नेताओं ने देश और मध्य प्रदेश में शिक्षा, रोजगार, भर्ती, प्रतियोगी परीक्षाओं तथा युवाओं के अधिकारों से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ कोई कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्रों के सवालों को उठाने वाला आंदोलन है। संविधान ने नरेंद्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनाया है और देश के छात्रों की आवाज सुनने तथा उनके सवालों का जवाब देने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री और भारत सरकार की है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस देशभर में छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठा रही है। जिस तरह छात्रों के आंदोलनों को दबाने की कोशिश की गई, वह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को शांत करने के लिए बल प्रयोग किया गया और कई स्थानों पर छात्रों के साथ दमनात्मक कार्रवाई हुई।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि मोहन भागवत जी के उज्जैन आगमन से उम्मीद थी कि मध्य प्रदेश के युवाओं के ज्वलंत सवालों पर बात होगी और भाजपा सरकार को कोई दिशा मिलेगी, लेकिन प्रदेश के लाखों युवाओं के सवाल आज भी अनुत्तरित हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में सरकारी विभागों में 1.04 लाख से अधिक पद खाली हैं। सरकार को बताना चाहिए कि इन पदों पर युवाओं की भर्ती कब होगी। पटवारी ने कहा कि सरकार के रोजगार पोर्टल पर 27 लाख से अधिक Job Seekers दर्ज हैं। इन युवाओं के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? MPPSC की कई भर्तियां वर्षों से लंबित हैं। युवा परीक्षा दें या नियुक्ति का इंतजार करें, सरकार को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि PLFS-2025 के अनुसार 15 से 29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर 4.2 प्रतिशत और शहरी युवाओं में 9.1 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह स्थिति बताती है कि युवाओं के सामने रोजगार का संकट कितना गंभीर है। पटवारी ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि UDISE+ के अनुसार मध्य प्रदेश में 7,217 Single-Teacher Schools हैं और इन स्कूलों में करीब 2.29 लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे सुनिश्चित होगी, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा, परिणाम, चयन और नियुक्ति में होने वाली देरी युवाओं के जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष छीन रही है। सरकार को समयबद्ध भर्ती कैलेंडर लागू करना चाहिए और कौशल विकास के बाद युवाओं के लिए स्थायी रोजगार का रास्ता सुनिश्चित करना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से जुड़े सवालों को सामने रखते हुए कहा कि 19 सितंबर को इंदौर में होने वाली ‘छात्रों की गूंज’ में छात्रों और युवाओं की वास्तविक आवाज सामने आएगी।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि जो बच्चा पढ़ना चाहता है, उसकी मेहनत और सपनों को कुचलने का काम आज की शिक्षा व्यवस्था कर रही है। देश के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की तैयारी चल रही है और लोकतंत्र को बचाने के लिए राहुल गांधी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत रखना है तो हम सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। ‘छात्रों की गूंज’ का उद्देश्य ही यही है कि युवाओं की आवाज सुनी जाए और उनके सवालों को राष्ट्रीय मंच मिले। शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया गया है। वर्ष 2026-27 के बजट में शिक्षा के लिए लगभग 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान और बजट में लगभग 0.9 प्रतिशत हिस्सेदारी होने की बात सामने आती है। जब शिक्षा के लिए पर्याप्त बजट नहीं होगा तो मध्य प्रदेश के युवाओं की मांगें कैसे पूरी होंगी? उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में 72 हजार से अधिक शिक्षक पद खाली हैं और 90 हजार से अधिक पदों पर बैकलॉग भर्ती लंबित है। अतिथि शिक्षक सड़कों पर हैं, पैसा एक्ट को लेकर आदिवासी वर्ग आंदोलन कर रहा है। चुनाव के समय युवाओं का उपयोग किया जाता है, लेकिन चुनाव के बाद उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता।उन्होंने प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की स्थिति पर भी चिंता जताई
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