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अग्निपथ योजना को चुनौती देने वाली याचिकाओं फैसला सुरक्षित रखा
दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि अग्निवीर का कैडर बिल्कुल अलग है और भारतीय सेना को दी गई उनकी चार साल की सेवा को रेगुलर सर्विस नहीं माना जाएगा। चार साल पूरा होने के बाद अगर कोई अग्निवीर को सेना में शामिल किया जाता है तो उसकी नियुक्ति को नई नियुक्ति मानी जाएगी। केंद्र सरकार ने कहा था कि अग्निवीर का कैडर सिपाही के कैडर से नीचे होगा। अग्निवीर के तौर पर शामिल करने के पीछे तर्क ये है कि वो बेसिक ट्रेनिंग लेता है और अगर वो सेना में सिपाही के पद पर नियुक्त होता है तो उनकी ट्रेनिंग अग्निवीर से उच्च स्तर की होगी।
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