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यह पत्र 15 वर्ष की नाबालिग मां व उसके परिजन ने सरकार को लिखा है। नवजात बच्ची को जन्मे तीन माह से ज्यादा हो गया है, लेकिन नाबालिग मां व उसके परिजन उसे देखना तक नहीं चाहते। मामला खण्डवा के पास रहने वाली नाबालिग छात्रा है जिसके साथ इंदौर के 13 वर्षीय बालक ने रेप किया था और वह गर्भवती हो गई। दरअसल लड़की इंदौर में अपनी बीमार मौसी की देखभाल के लिए आई थी। यहां पास में रहने वाले बालक ने मौसी के परिवार के बाहर जाने के बाद उससे जबर्दस्ती संबंध बनाए थे। मामले में लसूड़िया थाना पुलिस ने बालक के खिलाफ केस दर्ज कर उसे पकड़ा था जबकि छात्रा की सातवें माह में ही डिलीवरी हो गई थी और उसने प्रिमेच्योर बच्ची को जन्म दिया था। इसके बाद नाबालिग मां व उसके परिजन ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया था।
नियम-प्रावधानों के अनुसार महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने नाबालिग मां व उसके परिजन की कई बार काउंसलिंग की लेकिन वे बच्ची को अपनाने को राजी नहीं हुए। अंतिम प्रक्रिया के तहत 10 जनवरी को बाल कल्याण समिति (खण्डवा) के अध्यक्ष विजय सनावा, पुलिस विभाग के बाल कल्याण समिति की टीम आदि फिर नाबालिग मां व उसके परिजन के घर पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि बच्ची को किसी को गोद देने के पहले अंतिम दो माह का समय और दिया जाता है। ऐसे में अगर बच्ची को वे अपनाना चाहते हैं या नहीं, इसे लेकर लिखित आवेदन देना होगा। इसके साथ ही नाबालिग मां व परिजन की काफी काउंसलिंग की लेकिन उनका रुख यही रहा कि वे किसी भी हालत में बच्ची को नहीं अपनाएंगे।
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