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कहते सुबह का भोला यदि शाम को लौट आये तो उसे भोला नहीं कहते है,ऐसे ही कोई गुमशुदा इंसान मिल जाए तो उसके परिवार के लिए इससे बड़ी ख़ुशी क्या होगी। इंदौर में लावारिसों के लिए काम करने वाले एक ग्रुप को 5 फरवरी 2023 को सूचना मिली कि मध्यप्रदेश-राजस्थान बॉर्डर पर एक शख्स लंबे समय से लावारिस घूम रहा है। उसकी मदद करनी चाहिए। इसके बाद ग्रुप के दो सदस्य करीम पठान और जय्यू जोशी देर रात ही नीमच तरफ रवाना हो गए। वहां अलसुबह पहुंचने पर उन्होंने उस शख्स को तलाशना शुरू किया तो एक जगह झाड़ियों में वह मेले-कुचेले कपड़ों में बैठा मिला।उससे नाम-पता पूछा तो कुछ बता नहीं सका। जिस तरह से वह बड़बड़ा रहा था, उसकी बोली बिहार की जैसी लगी। वे उसे उसी दिन इंदौर ले आए। यहां लाकर सबसे पहले उसके लंबे बाल और दाढ़ी कटवाई। नहलाया और फिर अच्छे कपड़े पहनाकर फूल माला और साफा पहनाया। जिसके बाद उसे मेंटल अस्पताल बाणगंगा ले जाया गया और वहां भर्ती करा दिया।हॉस्पिटल सुपरिटेंडेट डॉ. वीएस पाल ने टीम के साथ उसका इलाज शुरू कर दिया। कुछ घंटे में ही उसमें हल्का सुधार दिखा तो उसका भरोसा जीतने के लिए उससे धीरे-धीरे बातें करने की कोशिश की गईं। वह बोलने लगा, लेकिन यह नहीं बता सका कि वह कौन है। सिर्फ खुद को मंडल, मंडल कहने लगा, लेकिन बोली सुनकर यह यकीन हो गया था कि वह बिहार या उसके आसपास का ही है।टीम के लोगों ने उसका घर पता करने के लिए कौशी नदी, मशहूर लिट्टी चौखा के साथ ही कुछ और तस्वीरें मोबाइल पर दिखाना शुरू कीं। जैसे ही उसके सामने मधुबनी की पेटिंग आई तो उसके हाव-भाव बदल गए। वह इशारे से यह बताने लगा कि हां, इसे वह जानता है। इससे टीम चौंक गई और उन्हें यह लगा कि मामला बिहार के मधुबनी से ही जुड़ा है। इसके बाद उसे कुछ और इसी तरह की तस्वीरें दिखाई तो यह लगने लगा कि लाइन सही दिशा में है।इसके बाद टीम ने बिहार सहित मधुबनी के सोशल एक्टिविस्ट से संपर्क किया और उन्हें इस शख्स के फोटो भिजवाए। बताया कि यह शख्स लंबे समय से मध्यप्रदेश में लावारिसों की तरह घूम रहा है। इसके बाद लोकल वॉट्सएप ग्रुप और फेसबुक पेजों पर उनके फोटोज भी डलवाए गए।तब एक युवक ने इसे पहचान लिया और बताया कि इसका हुलिया और शक्ल मधुबनी के लोकी थाना क्षेत्र से 5 साल पहले गुम हुए बद्री से मिलती-जुलती है। इसके बाद लोकी पुलिस से संपर्क कर उन्हें फोटो भिजवाए गए तो उन्होंने माता-पिता को बुलवाकर फोटो दिखाए। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए उस शख्स से माता-पिता का आमना-सामना कराया तो उसे देखते ही मां की आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने यह कहा कि यह मेरा बेटा बद्री ही है जो पांच साल पहले लापता हो गया था। हम बहुत सक्षम नहीं थे इसलिए ज्यादा तलाश नहीं कर पाए। यह सोच लिया कि अब यह शायद ही मिल पाए।
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