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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नक्सल गतिविधियों से जुड़े गंभीर फंडिंग मामले में आरोपी मोहन गावड़े को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। डिवीजन बेंच—मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल—ने कहा कि अपीलकर्ता की भूमिका सह-आरोपियों के समान है और ट्रायल की अंतिम प्रक्रिया चल रही होने के कारण उसे रिहा नहीं किया जा सकता।
अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2024 में मदनवाड़ा थाना क्षेत्र में नक्सल फंड से ट्रैक्टर और ट्रॉली खरीदी गई थी, जिनका उपयोग प्रतिबंधित नक्सली गतिविधियों में किया जा रहा था। मोहन गावड़े पर आरोप है कि उसने इन वाहनों का इस्तेमाल कर नक्सलियों की सहायता की। हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी के पेश न होने पर नाराजगी जताई और डीजीपी को निर्देश दिए कि ट्रायल में सभी जिम्मेदार अधिकारी और पुलिसकर्मी उपस्थित रहें।
अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, जबकि राज्य सरकार ने जमानत का विरोध किया। कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े हैं। चूंकि सह-आरोपियों को पहले ही राहत नहीं मिली है और 26 गवाहों की गवाही हो चुकी है, इसलिए मोहन गावड़े को जमानत देना उचित नहीं है। यूएपीए मामलों में केवल प्रथम दृष्ट्या संतोष होने पर ही जमानत दी जा सकती है, जो इस मामले में संभव नहीं है।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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