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इस बार भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस और वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ एक साथ मना रहा है। मुख्य परेड की थीम भी वंदे मातरम् पर आधारित रखी गई है। कर्तव्य पथ पर 30 झांकियां दिखाई जाएंगी, जिनकी थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र—वंदे मातरम्, समृद्धि का मंत्र—आत्मनिर्भर भारत’ है। इन झांकियों के बैकग्राउंड में 1923 में तेजेंद्र कुमार मित्रा द्वारा बनाई गई वंदे मातरम् पेंटिंग्स को प्रदर्शित किया जाएगा।
तेजेंद्र कुमार मित्रा की पेंटिंग्स ‘वंदे मातरम् चित्राधार’ नामक किताब में संग्रहित की गई थीं। यह एल्बम 1923 में कानपुर के प्रकाश पुस्तकालय के शिव नारायण मिश्रा वैद्य द्वारा प्रकाशित किया गया था। पेंटिंग्स में वंदे मातरम् गीत के संस्कृत शब्द, जैसे ‘सुजलां’ और ‘सुफलां’, को दर्शाया गया है। यह किताब दुर्लभ और आउट ऑफ प्रिंट मानी जाती है, साथ ही इसमें अरविंद घोष द्वारा लिखे वंदे मातरम् गीत का पूरा अंग्रेजी अनुवाद भी शामिल है।
16 जनवरी को दिल्ली के साउथ ब्लॉक में गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में डिफेंस सेक्रेटरी आरके सिंह ने इस खास एल्बम और पेंटिंग्स के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस बार के परेड में ये पेंटिंग्स कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय गर्व और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने के लिए प्रदर्शित की जाएंगी, जिससे दर्शकों को वंदे मातरम् गीत और उसकी ऐतिहासिक पेंटिंग्स की झलक मिल सकेगी।
Patrakar Priyanshi Chaturvedi
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