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रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को अपने दो दिवसीय प्रवास पर छत्तीसगढ़ पहुंची। पहले दिन मुर्मू ने प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के वार्षिक परियोजना सकारात्मक परिवर्तन वर्ष का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि हमारा देश नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है। चाहे चांद पर तिरंगा लहराना हो या विश्व स्तर पर खेल-कूद के क्षेत्र में नए अध्याय लिखने हों, हमारे देशवासी अनेक कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। यह बदलते भारत की खूबसूरत तस्वीर है।
शांति सरोवर रिट्रीट सेंटर रायपुर में समारोह का आयोजन किया गया। मंच पर राष्ट्रपति के साथ राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन एवं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मौजूद रहे। कार्यक्रम में राष्ट्रपति का स्वागत शाल और प्रतीक चिन्ह से किया गया। राज्यपाल और मुख्यमंत्री का भी ब्रह्मकुमारी सेवा सरोवर की ओर से स्वागत हुआ। राष्ट्रपति ने दीप प्रज्वलित कर सकारात्मक परिवर्तन वर्ष 2023 का शुभारंभ किया।
इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पूरी मानवता के कल्याण के उद्देश्य से ब्रह्माकुमारी संस्था की ओर से अनेक कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। मनुष्य की सोच और व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए शुरू किए गए ऐसे कार्यक्रमों के लिए मैं ब्रह्माकुमारी परिवार की सराहना करती हूं। पिछले महीने 27 जुलाई को मैंने ओडिशा में भी 'The Year of Positive Change' के theme से जुड़े कार्यक्रम में भाग लिया था। आज छत्तीसगढ़ में भी इस प्रयास का आरम्भ करते हुए मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है।
आज मैं बहुत प्रसन्न हूँ कि मुझे छत्तीसगढ़ की धरती पर आकर आप सबसे मिलने का अवसर मिला। राष्ट्रपति के रूप में छत्तीसगढ़ आकर अपने देशवासियों से मिलने की मेरी इच्छा आज पूरी हुई है। एक कहावत है-‘छत्तीसगढ़िया सब ले बढ़िया’ और ऐसी कहावतों के माध्यम से सदियों से चले आ रहे सत्य को मात्र शब्दों में कह दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले ही नीट की तैयारी करने वाले दो विद्यार्थियों ने अपने जीवन, अपने सपनों और अपने भविष्य का अंत कर दिया। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पढ़ाई कर रहे कई बच्चों ने पिछले दिनों आत्महत्या की है। प्रतिस्पर्धा एक सकारात्मक भाव है, जिससे जीवन संवरता है। हार-जीत तो जीवन का हिस्सा है। मुझे बहुत दुख होता है, जब कुछ बच्चों में कई कारणों से नकारात्मक भाव उत्पन्न हो जाते हैं।
इस बात के अनेक उदाहरण हैं कि क्षणिक असफलता में भविष्य की सफलता निहित होती है। मेरी इस भावी पीढ़ी के परिवार के लोगों, दोस्तों, अध्यापकों और समाज से अपील है कि वे इन बच्चों की मानसिकता को समझकर इनकी सहायता करें। मैं सभी से कहना चाहूंगी कि अगर बच्चों पर पढाई का, प्रतियोगिता का दबाव है, तो सकारात्मक सोच के जरिये उसे दूर करके उनको आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद करें। जितना जरूरी उनका करियर है, उतना ही ज़रूरी है कि वे जीवन की चुनौतियों का डट कर सामना करें।
उन्होंने आगे कहा कि हर एक व्यक्ति को ईश्वर ने अलग बनाया है और सब में अनोखी प्रतिभाएं होती हैं। दूसरों से प्रेरणा लेना अच्छी बात है, लेकिन अपनी रुचियों, अपनी क्षमताओं को समझकर अपने लिए सही दिशा का चुनाव करना चाहिए। इसके लिए स्वयं से संवाद करना आवश्यक है। हमारे ब्रहमाकुमारी परिवार के सदस्य इस दिशा में कई वर्षों से कार्यरत हैं। मनुष्य के अंतर्मन को जागृत करके उसकी क्षमताओं को बढ़ाया जा सकता है। सकारात्मक सोच और कार्यों से केवल अपनी ही नहीं बल्कि आस-पास के सब लोगों का जीवन भी बेहतर बनाया जा सकता है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि मेरी आध्यात्मिक यात्रा में भी ब्रह्माकुमारी संस्था ने मेरा बहुत साथ दिया। ब्रहमाकुमारी बहनें और भाई भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य देशों में भी प्रेम, सद्भाव और शान्ति के विस्तार के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। किसी की सोच में बदलाव लाना आसान नहीं होता, लेकिन हम यह भी जानते हैं कि प्रबल इच्छाशक्ति से किये गए कार्य में सफलता जरूर मिलती है। संकल्प शक्ति और निरंतर प्रयास के बल पर महिला नेतृत्व वाला यह ब्रह्माकुमारी संगठन जन-कल्याण की भावना के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है और दुनिया को बेहतर बनाने में अमूल्य योगदान दे रहा है।
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