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शाह ने कहा- दंगों के वक्त मेरे साथ विधानसभा में थी माया.   प्रद्युम्न की हत्या के बाद खुला रेयान स्कूल.   आतंकवाद से साथ मिलकर लड़ेंगे भारत-जापान:शिंजो आबे.   प्रद्युम्न मामले में जुवेनाइल एक्ट के तहत होगी कार्रवाई.   साक्षरता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया.   छत्तीसगढ़ को मिले चार राष्ट्रीय पुरस्कार.   मध्यप्रदेश के सभी गाँव और शहर खुले में शौच से मुक्त किये जाएंगे.   शिवराज ने ग्राम रतनपुर में किया श्रमदान.   डेंगू लार्वा मिलने पर होगा 500 रुपये का जुर्माना.   पदयात्रा में जनहित विकास कार्यों की शुरुआत.   लोगों से रू-ब-रू हुए मुख्यमंत्री चौहान.   फैलोज व्यवहारिक और सैद्धांतिक अनुभवों पर आधारित सुझाव दें.   मजदूरों को छत्तीसगढ़ में पांच रूपए में मिलेगा टिफिन.   अम्बुजा सीमेंट में पिस गए दो मजदूर.   एम्बुलेंस ये ले जाती है नदी पार .   भालू के हमले से दो की मौत.   जोगी की जाति के मामले में सुनवाई फिर टली.   5 ट्रेनें रद्द, दो-तीन दिन बनी रहेगी परेशानी.  

पन्ना News


महिला कृषक

महिला कृषकों के 1038 स्व-सहायता समूह गठित  मध्य प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिये पिछले वर्ष महिला कृषकों के 1038 स्व-सहायता समूह गठित किये गये। इन समूहों में महिला कृषकों के 437 अंतर्जिला प्रशिक्षण भी आयोजित किये गये। इसके अलावा 1555 महिला कृषकों को कृषि की उन्नत तकनीक अपनाने के लिये प्रशिक्षण दिलवाया गया। इस योजना पर पिछले वर्ष 4.50 करोड़ की राशि व्यय की गयी। इस वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिये 6 करोड़ रुपये की व्यवस्था सुनिश्चित की गयी है। मध्यप्रदेश में कृषि के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के मकसद से किसान कल्‍याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा योजना शुरू की गयी है। योजना का उद्देश्य प्रदेश में महिला कृषकों के जीवन-यापन स्तर में सुधार लाना है। महिला कृषकों को कृषि की कम लागत की तकनीक चुनने, उसे समझने और अपनाने के योग्य बनाना भी है।  

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 MadhyaBharat  8 July 2017

हथिनी रूपकली

  पन्ना टाइगर रिजर्व में हथिनी रूपकली ने कल स्वस्थ मादा शावक को जन्म दिया। रूपकली और उसकी बेटी रूपहली दोनों स्वस्थ है। रूपहली के जन्म के साथ रिजर्व में हाथियों की संख्या 15 हो गई है। हथिनी रूपकली और अनारकली को सोनपुर मेले में से खरीद कर लाया गया था। रूपकली इसके पहले 5 और सन्तानों को जन्म दे चुकी है। हाथियों का रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है। हाथी प्रभारी श्री उदयमणि सिंह परिहार ने बताया कि रूपकली की आयु लगभग 55 वर्ष है और उसके 6 बच्चों में 5 जीवित है, जो पार्क की सुरक्षा में लगे हैं। हाथी सुबह जंगल में चरते हैं। शाम के खाने में 9 किलो आटा, एक किलो बेसन और 250 ग्राम नमक की रोटी बनाके खिलाई जाती है। पार्क की सबसे उम्रदराज दन्त विहीन हथिनी वत्सला को हरा चारा न खा पाने के कारण सुबह दलिया और शाम को 5-5 किलो का गेहूँ-चावल का लड्डू दिया जाता है  

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 MadhyaBharat  27 February 2017

farji trak

  फर्जी टी.पी. पर ट्रक से कर रहे थे पत्थर परिवहन  पन्ना में वन विभाग ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर फर्शी पत्थर का परिवहन कर रहे ट्रक को पकड़कर प्रकरण कायम किया है। आरोपी उड़नशील स्याही द्वारा एक ही अभिवहन पास का बार-बार उपयोग कर लाखों रुपये के खनिज राजस्व की चोरी कर रहे थे। आरोपियों के खिलाफ वन क्षेत्र में अवैध उत्खनन और परिवहन का प्रकरण कायम कर जाँच शुरू कर दी गयी है। मुख्य वन संरक्षक श्री विश्राम सागर शर्मा और वन मण्डलाधिकारी श्री अनुपम सहाय ने कल मोहन्द्रा और पवई वन क्षेत्र के भ्रमण के दौरान कुटरहिया-हडा मार्ग पर पत्थर पटियों से भरा ट्रक क्रमांक-एम.पी. 20 जीए-0129 देखा। उन्होंने हडा बेरियर पर वनकर्मियों को ट्रक का अभिवहन पास (टी.पी.) और अन्य कागजात की जाँच करने के निर्देश दिये। पूरा भरा होने के बावजूद अभिवहन पास जाँच में संदिग्ध पाया गया। वनकर्मी ने जैसे ही माचिस जलाकर टी.पी. को आग दिखायी, उसमें उड़नशील स्याही से लिखे सारे अक्षर गायब हो गये। प्राथमिक जाँच में वाहन चालक जाहर सिंह ने ट्रक खिरवा अमानगंज निवासी भानुप्रताप सिंह का होना बताया है। यह अभिवहन पास अनुज्ञा-पत्र धारक ठेकेदार कल्लू शाह, ग्राम कुटरहिया और खनिज फर्शी पत्थर, खदान के नाम जारी होना पाया गया।    

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 MadhyaBharat  22 December 2016

पन्ना टाइगर रिजर्व

पन्ना टाइगर रिजर्व से  दिवाली की शानदार खबर सामने आयी है ,यहाँ दो बाघिनों ने 6 शावकों को  जन्म दिया है।  पन्ना टाइगर रिजर्व में एक साथ छ नन्हे मेहमानों के आने से ख़ुशी का माहौल है।  बाघिन टी-6 ने पिछले दिनों  चार बच्चों को जन्म दिया है अब इन बच्चों का अपनी माँ के साथ खेलते और मस्ती करते फोटो सामने आया है। वही रिजर्व के दूसरे छोर पर p-222 बाघिन  ने 2 शावकों को जन्म दिया है। यह शावक अभी बहुत छोटे हैं और बाघिन इनकी देखरेख कर रही है। पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन को  को मिला भी इनका पहली बार फोटो मिला है। यह जानकारी टाइगर रिजर्व के संयुक्त संचालक आर के मिश्रा ने दी। 

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 MadhyaBharat  4 November 2016

13 बाघों की मौत

मध्य प्रदेश के दो राष्ट्रीय उद्यानों में पिछले एक साल में विषाक्तता, बिजली का झटका लगने और दूसरे कई कारणों से कम से कम 13 बाघ मर चुके हैं। राज्य वन विभाग ने एक RTI का जवाब देते हुए बताया कि पेंच राष्ट्रीय उद्यान में नौ बाघों की मौत हो गयी जबकि बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में चार बाघ मारे गए। पेंच उद्यान को मोगली के घर के तौर पर जाना जाता है जो अंग्रेज लेखक रुडयार्ड किपलिंग के फिक्शन उपन्यास 'जंगल बुक' का मुख्य किरदार है। राज्य के राष्ट्रीय उद्यानों में बाघों के शिकार के मामलों की जांच की मांग को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर करने वाले वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने सूचना का अधिकार आवेदन देकर पिछले एक साल में मारे गए बाघों के ब्यौरे मांगे थे। वन विभाग ने विषाक्तता, बिजली का झटका लगना, बीमारी, दूसरे बाघों से लड़ाई और कुएं में डूबने को बाघों के मारे जाने की वजह बताया है। मध्य प्रदेश में छह बाघ अभयारण्य हैं जिनमें कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना, बोरी-सतपुडा , संजय-दुबरी और पेंच शामिल हैं। इन अभयारण्यों में करीब 257 बाघ हैं। 2010 में देश में बाघों की आबादी 1,706 थी और 2014 में यह बढ़कर 2,226 हो गयी। बाघों की आबादी के लिहाज से कर्नाटक और उत्तराखंड के बाद मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर आता है। भारतीय वन्यजीव संरक्षण सोसायटी के आंकड़ों के मुताबिक साल 2016 में करीब 100 बाघों की मौत हो चुकी है। जिनमें से 36 बाघों को शिकार करने के लिए मारा गया है।

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 MadhyaBharat  17 October 2016

shivraj singh god me

    पहला विश्लेषण : मध्य प्रदेश के उन दो पुलिसकर्मियों को तहेदिल से बधाई, जिन्होंने अपने मुख्यमंत्री को गोद में उठा रखा है. मुख्यमंत्री की निंदा या इस तस्वीर पर मौज लेने वाले यह न देख पाये कि उस तस्वीर में एक को छोड़ बाकी सब अपना दायित्व निभा रहे हैं, बल्कि मुख्यमंत्री को गोद में उठाने वाले दोनों ही जवान हंस रहे हैं. दोनों ने मुश्किल से अपनी हंसी रोक रखी है, मानो वे मुख्यमंत्री को गोद से उतारकर खूब हंसना चाहते हों. उनका पेट फटने वाला हो. बल्कि दोनों सिपाहियों के पीछे सफ़ारी सूट में जो जवान नज़र आ रहे हैं, वो सरकारी तंत्र का यह परफ़ेक्ट पिक्चर प्रस्तुत कर रहे हैं. जो काम कर रहा है, वह हंस रहा है. जो काम नहीं कर रहा है, वो ऐसे दम फुलाये है, जैसे वही काम कर रहा है.   दूसरा विश्लेषण : अब आते हैं तस्वीर के मुख्य किरदार यानी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर. तस्वीर देखकर दो बातें नज़र आईं. पहला कि मुख्यमंत्री ज़रा भी असहज नहीं हैं, बल्कि अभ्यस्त लग रहे हैं. दूसरा, अगर पहली बार गोद में बैठे हैं तो उस लिहाज़ से भी उनका परफॉर्मेंस अच्छा है. हेलिकॉप्टर में बैठकर खिड़की से एकांत उदास धरा पर फैले जल-जीवन को देखने की तस्वीर की जगह यह तस्वीर कितनी अच्छी है. वे वहां से बाढ़ का मुआयना कर रहे हैं, जहां से बाढ़ में फंसे लोग मुआयना करने वाले हेलिकॉप्टर को आंख पर उंगलियों के छज्जे बनाकर देखा करते हैं.   तीसरा विश्लेषण : पानी का स्तर सभी के घुटने से काफी नीचे दिख रहा है. जहां पर मुख्यमंत्री को गोद में उठाया गया, वहां तो पानी सामान्य है. ख़तरे के निशान से काफी नीचे. जाच होनी चाहिए कि ऐसी जगह पर गोद में उठाने का निर्देश किसने दिया या सिपाहियों ने अति उत्साह में अपने मुख्यमंत्री को गोद में उठा लिया. क्या ये सिपाही अपने मुख्यमंत्री को कम गहरे पानी से अधिक गहरे पानी की तरफ ले जा रहे थे? अगर ऐसा है तो मामला ख़तरनाक लगता है. मैं सिर्फ तस्वीर के आधार पर विश्लेषण पेश कर रहा हूं. सूचना के आधार पर नहीं.   चौथा विश्लेषण : एक और तस्वीर है, जिसमें शिवराज सिंह के पांव पानी में हैं. ऐसा लगता है कि उनके पांव पड़ते ही पानी ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं. इस तस्वीर में वे गोद में नहीं हैं, मगर इस बार उनका जूता किसी की गोद में है. मुख्यमंत्री को गोद में उठाने वाले दोनों सिपाही फ्रेम से बाहर हैं, बल्कि ग़ायब हैं. राम जाने कहीं निलंबित न हो गए हों! सफ़ारी सूट वाले सुरक्षाकर्मी को जूते उठाने का मौका मिला है. सुरक्षाकर्मी ने इसलिए जूते उठाए होंगे, क्योंकि मुख्यमंत्री ने अपने दोनों हाथ से पजामे उठा रखे हैं. उनका हाथ फ्री नहीं है, वर्ना वे अपने जूते आप ही उठाते. अब एक साथ पजामा भी उठाओ और जूता भी, मेरे ख़्याल से मीडिया यह कभी नहीं समझ पाएगा.   पांचवा विश्लेषण : सीएम के पीछे के सारे लोग अपने जूते में हैं. वे आराम से उसी पानी में चल रहे हैं, जिसमें सीएम के भाव से ऐसा लग रहा है जैसे वे कमर भर पानी में चले जा रहे हों. यहां तक कि जिसके कंधे पर मुख्यमंत्री के जूते का भार है, उसने भी अपने जूते नहीं उतारे हैं. कहीं ऐसा तो नहीं कि उस सुरक्षाकर्मी के पास कई जोड़ी जूते हैं और सीएम के पास एक जोड़ी ही. इसके अलावा मेरी नज़र मुख्यमंत्री का जूता उठाये सुरक्षाकर्मी के बगल में चल रहे एक खाकीधारी पुलिसकर्मी पर पड़ी. उसके दोनों पांव ख़ाली थे, जूता मुक्त. तब से सोच रहा हूं कि उसके जूते किसने उठा रखे होंगे!  

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 MadhyaBharat  22 August 2016

flad mp

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बाढ़ से प्रभावित हर व्यक्ति को सहायता दी जायेगी। उन्होंने कहा कि एक-एक घर का सर्वे कर क्षति का आकलन कर सहायता राशि के साथ ही पुनर्वास सामग्री भी उपलब्ध करवायी जायेगी। अतिवर्षा से प्रभावित इलाकों का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा इस आपदा की घडी में सभी मानवीय संवेदना का परिचय दें।    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बाढ़ के दौरान किसी की मृत्यु होने पर उसे मुआवजे के रूप में 4 लाख रुपये दिये जायेंगे। मकान पूर्णत: क्षतिग्रस्त होने पर 95 हजार रुपये और बाढ़ प्रभावित परिवार को 50 किलो गेहूँ दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि बाढ़ से गाय-भैंस की मृत्यु पर 30 हजार रुपये, बछड़ा-बछड़ी की मृत्यु पर 10 हजार, सुअर की मृत्यु पर 3000, मुर्गा-मुर्गी की मृत्यु पर 60 रुपये की सहायता संबंधित को दी जायेगी। उन्होंने कहा कि झुग्गियों और दुकानों के क्षतिग्रस्त होने पर तत्काल सहायता के तौर पर 6000 रुपये उपलब्ध करवाये जायेंगे।   मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी-नालों के किनारे बसे व्यक्तियों को उनकी सहमति से सुरक्षित स्थान पर बसाने का भी कार्य किया जायेगा, जिससे उन्हें निचले इलाकों में आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान से हमेशा के लिये निजात दिलवायी जा सके। मुख्यमंत्री रीवा में निपानिया, पदमधर कॉलोनी सहित अनेक बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। श्री चौहान ने निर्देश दिये कि शहर में मलवा हटाकर व्यापक पैमाने पर सफाई कार्य किया जाये। ब्लीचिंग पावडर और दवाई का छिड़काव किया जाये, ताकि बीमारी न फैले। मृत पशुओं को तत्काल उठवाने के निर्देश दिये। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने और प्रभावितों को अगले दो दिन तक खाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने बाढ़ में क्षतिग्रस्त घरों के स्वामियों को पन्नी और बाँस-बल्ली देने को कहा। श्री चौहान त्यौंथर और जवा भी गये और राहत-पुनर्वास कार्यों का अवलोकन किया।   मुख्यमंत्री श्री चौहान बाढ़ प्रभावितों के लिये बनाये गये अस्थायी राहत शिविरों में भी पहुँचे। उन्होंने प्रभावितों के लिये दिये जाने वाले भोजन और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने पीड़ितों से कहा कि मैं आपके दुख-दर्द में सहभागी बनने आया हूँ। आपको हरसंभव सहायता दी जायेगी। उन्होंने स्वयं अपने हाथों से बाढ़ प्रभावितों को नाश्ता दिया।   मुख्यमंत्री ने पन्ना के बाढ़ प्रभावित गाँवों का भी किया निरीक्षण   चौहान ने पन्ना जिले के अमानगंज पहुँचकर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गाँवों का दौरा किया। श्री चौहान ने अमानगंज, गढ़ोखर, कमताना, बिल्हा, हिनौती, सिंघोरा सहित कई गाँव में बाढ़ पीड़ितों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ की सूचना मिलते ही वे सभी कार्यक्रम स्थगित कर सतना, रीवा और पन्ना आये हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ की सूचना मिलते ही सड़क मार्ग से इटारसी पहुँचकर ट्रेन पकड़ी और सतना-रीवा में राहत बचाव कार्य का जायजा लेने के बाद पन्ना आये हैं। श्री चौहान ने कहा कि सरकार बाढ़ पीड़ितों की हरसंभव सहायता करेगी। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का तत्काल सर्वेक्षण करने के निर्देश दिये गये हैं। पूरी पारदर्शिता से सर्वेक्षण कर उचित मुआवजा दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने नंगे पैर चल नाले के पार जाकर बाढ़ पीड़ितों से भेंट की। मुख्यमंत्री ने कमताना तथा गढ़ोखर में आम जन से संवाद किया। उन्होंने पण्डवन में केन नदी पर बने पुल का निरीक्षण कर कहा कि पुल का तकनीकी परीक्षण करवाया जायेगा। आवश्यक होने पर पुल में सुधार और उसे चौड़ा करने की कार्यवाही की जायेगी। श्री चौहान ने कमताना में ट्रेक्टर में सवार होकर आमजन से वार्तालाप किया।   मानवीय संवेदनाओं के साथ बाढ़ पीड़ितों की मदद करें मुख्यमंत्री  चौहान ने अधिकारियों को  बाढ़ पीड़ितों को पूरी मानवीय संवेदनाओं के साथ अधिकतम हरसंभव मदद उपलब्ध करवाने के निर्देश दिये हैं।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को अगले दो दिन तक पका भोजन उपलब्ध करवाया जाये। इसके बाद प्रत्येक पीड़ित परिवार को 50 किलो खाद्यान्न दिया जाये। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावितों को राहत सहायता मध्यप्रदेश सरकार देगी। इसके लिये शीघ्र ही सर्वे का काम प्राथमिकता से शुरू करवाकर पूरा किया जाये। सर्वे दल में पार्षद, पंच सहित स्थानीय जन-प्रतिनिधि या जाये। बाढ़ से क्षति का आकलन कर तत्काल राहत सहायता दी जाये।   मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि क्षतिग्रस्त सड़क, पुल-पुलिया, विद्युत लाइन, विद्युत खम्बे, पेयजल पाइप लाइन का सुधार काम युद्ध-स्तर पर किया जाये। उन्होंने रीवा नगर के क्षतिग्रस्त पेयजल फिल्टर प्लांट की तत्काल मरम्मत करवाने के निर्देश दिये। इसके लिये आवश्यक धनराशि शीघ्र दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावितों को राहत पहुँचाने में प्रशासन ने पूरी मुस्तैदी से काम किया। साथ ही समाज के लोगों की भरपूर मदद मिली। स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग भी सराहनीय रहा।   मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में भी कई इलाकों में बारिश की चेतावनी है। इसके मद्देनजर जल-निकासी की पूरी तैयारी करें। अति-वर्षा एवं बाढ़ की स्थिति में बचाव काम और राहत के इंतजाम सुनिश्चित किये जायें। बताया गया कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, होमगार्ड, पुलिस बल, शासकीय सेवक, नागरिक, स्वयंसेवी संगठन ने बचाव एवं राहत कार्य में सराहनीय योगदान दिया है।  

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 MadhyaBharat  22 August 2016

valture

  सर्वाधिक गिद्ध पन्ना में      मध्यप्रदेश में 14 मई को हुई राज्य-व्यापी गिद्ध गणना के द्वितीय चरण में 7000 गिद्ध पाये गये हैं। सर्वाधिक 993 गिद्ध पन्ना जिले और संरक्षित क्षेत्र में 1133 गिद्ध पन्ना टाइगर रिजर्व में मिले हैं। प्रथम चरण की गणना 23 जनवरी को हुई थी, जिसमें 6900 गिद्ध मिले थे।   प्रदेश के कुल 35 जिलों में गिद्धों की उपस्थिति पायी गयी है। पन्ना के बाद सबसे अधिक 681 गिद्ध मंदसौर जिले में, 659 छतरपुर और 537 श्योपुर जिले में मिले हैं। संरक्षित क्षेत्रों में गांधी सागर अभयारण्य में 661, कूनो वन्य-प्राणी वन मण्डल में 406 और बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 229 गिद्ध पाये गये हैं। ग्रीष्म ऋतु होने से अधिकांश गिद्ध जल-स्रोतों के आसपास मिले हैं।   प्रथम गणना की तुलना में कुछ स्थानों पर गिद्धों की संख्या में कमी और कुछ में वृद्धि देखी गयी। उल्लेखनीय है कि जनवरी की गणना के दौरान प्रदेश में प्रवासी गिद्ध भी मौजूद थे, जो वापस ठण्डे उत्तरी क्षेत्र में जा चुके हैं। ग्रीष्म ऋतु में प्रदेश की 4 स्थानीय प्रजातियाँ देशी गिद्ध, राजगिद्ध, सफेद गिद्ध और चमर गिद्ध मिलीं। इनमें सफेद गिद्ध की संख्या सर्वाधिक होने की उम्मीद है। गिद्धों का प्रजनन-काल नवम्बर से अप्रैल तक रहता है। अत: ग्रीष्म ऋतु की गणना में अवयस्क गिद्धों की संख्या में बढ़ोत्तरी की संभावना है।   गणना से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण भारतीय वन प्रबंध संस्थान भोपाल द्वारा किया जायेगा। इसके बाद एक सचित्र एटलस तैयार कर गिद्धों की संख्या वृद्धि के लिये रणनीति तैयार की जायेगी। सर्वाधिक गिद्ध पन्ना में      मध्यप्रदेश में 14 मई को हुई राज्य-व्यापी गिद्ध गणना के द्वितीय चरण में 7000 गिद्ध पाये गये हैं। सर्वाधिक 993 गिद्ध पन्ना जिले और संरक्षित क्षेत्र में 1133 गिद्ध पन्ना टाइगर रिजर्व में मिले हैं। प्रथम चरण की गणना 23 जनवरी को हुई थी, जिसमें 6900 गिद्ध मिले थे।   प्रदेश के कुल 35 जिलों में गिद्धों की उपस्थिति पायी गयी है। पन्ना के बाद सबसे अधिक 681 गिद्ध मंदसौर जिले में, 659 छतरपुर और 537 श्योपुर जिले में मिले हैं। संरक्षित क्षेत्रों में गांधी सागर अभयारण्य में 661, कूनो वन्य-प्राणी वन मण्डल में 406 और बाँधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 229 गिद्ध पाये गये हैं। ग्रीष्म ऋतु होने से अधिकांश गिद्ध जल-स्रोतों के आसपास मिले हैं।   प्रथम गणना की तुलना में कुछ स्थानों पर गिद्धों की संख्या में कमी और कुछ में वृद्धि देखी गयी। उल्लेखनीय है कि जनवरी की गणना के दौरान प्रदेश में प्रवासी गिद्ध भी मौजूद थे, जो वापस ठण्डे उत्तरी क्षेत्र में जा चुके हैं। ग्रीष्म ऋतु में प्रदेश की 4 स्थानीय प्रजातियाँ देशी गिद्ध, राजगिद्ध, सफेद गिद्ध और चमर गिद्ध मिलीं। इनमें सफेद गिद्ध की संख्या सर्वाधिक होने की उम्मीद है। गिद्धों का प्रजनन-काल नवम्बर से अप्रैल तक रहता है। अत: ग्रीष्म ऋतु की गणना में अवयस्क गिद्धों की संख्या में बढ़ोत्तरी की संभावना है।   गणना से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण भारतीय वन प्रबंध संस्थान भोपाल द्वारा किया जायेगा। इसके बाद एक सचित्र एटलस तैयार कर गिद्धों की संख्या वृद्धि के लिये रणनीति तैयार की जायेगी।

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 MadhyaBharat  17 May 2016

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